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दृष्टीबाधितों की सहायता कैसे कर सकते हैं।
सामाजिक जिम्मेदारी को निभाने की इस जागरुकता में हम आपका अभिनंदन करते हैं।

क्लब का उद्देश्यः-
“शिक्षा के माध्यम से दृष्टीबाधित छात्रों को आत्मनिर्भर बनाना”

मित्रों, हमारे समाज में एक विचार धारा व्याप्त है कि, दृष्टीबाधित लोगों को एक विशेष प्रकार की शिक्षा (ब्रेल लीपी) के माध्यम से पढाया जा सकता है। ये पूरी तरह से सच नही है। कोई भी शिक्षित व्यक्ति दृष्टीबाधित बच्चों को पढा सकता है, उसके लिए ब्रेल लीपी का आना अनिवार्य नही है। उनकी शिक्षा-दिक्षा भी सरकार द्वारा चलाए गये पाठ्यक्रम के अनुसार ही होती है। सामान्यतः कक्षा आठवीं तक सरकारी पाठ्यक्रम की पुस्तकें ब्रेल में उपलब्ध हैं। कक्षा नवीं से आगे की कक्षाओं के लिए ब्रेल में पर्याप्त अध्ययन सामग्री उपलब्ध नही है। जिसके लिए पाठ्य सामग्री को दृष्टीसक्षम लोग रेकार्ड(Record) करते हैं और उस रेकार्ड की गई अधययन सामग्री को दृष्टीबाधित बच्चे सुनकर याद करते हैं।

उनकी सहायता कैसे कर सकते हैं?
1:- Friends, आप उनकी पाठ्य सामग्री को रेकार्ड(Record) कर सकते हैं। आज लगभग सभी के पास कम्प्युटर या लैपटॉप उपलब्ध है और लगभग सभी के पास स्मार्ट फोन भी उपलब्ध है, जिसमें रेकार्डिंग की सुविधा है। इसके अलावा आप ऑडेसिटि या जेट ऑडियो सॉफ्टवेयर को गुगल से डाउनलोड कर सकते हैं और उसके माध्यम से आप दृष्टीबाधित बच्चों के लिए उनकी आवश्यकता के अनुसार पाठ्य पुस्तिका या जो 20-30 प्रश्न-उत्तर की गाइड आती है उसे रेकार्ड कर सकते हैं। आप जब ऐसे बच्चों से जुङेंगे तो वो स्वंय ही आपको किताब देंगे इसे आपको खरीदना नही है सिर्फ आपको अपना अमुल्य समय रेकार्डिंग के माध्यम से उनको देना होगा। रेकार्ड की गई पाठ्य सामग्री की सीडी बनाकर उनको देनी होगी। यदि आप सीडी का व्यय उठाने में सक्षम हैं तो आप अपने पास से भी सीडी दे सकते हैं अन्यथा आप उन बच्चों से पुस्तक के साथ खाली सीडी भी ले सकते हैं।

(इस कार्य हेतु आप अपनी आवाज में एक ऑडियो हमे मेल करें या वाट्सअप पर भेंजे। हिंदी एवं अंग्रेजी जिस भी भाषा में आप रेकार्ड करना चाहते हैं। एक घंटे में 5 से 6 पेज रेकार्ड किये जा सकते हैं। इस आधार पर एक महिने में लगभग 200 पेज रेकार्ड किया जा सकता है।)

2:- एक और बङी समस्या है, जिसके कारण कई दृष्टीबाधित बच्चों की सालभर की मेहनत परिक्षा के समय सहलेखक (Scribe) के अभाव में व्यर्थ हो जाती है। आप उनके लिए परिक्षा के समय सहलेखक (Scribe) का कार्य कर सकते हैं। इसके अंर्तगत दृष्टीबाधित बच्चे उत्तर बोलते हैं आपको उन उत्तरों को उत्तर-पुस्तिका पर लिखना होता है और पेपर पढ कर उनको प्रश्न बताना होता है। बैंक, रेलवे तथा अन्य प्रशासनिक प्रवेश परिक्षाएं ज्यादातर रविवार को आयोजित होती हैं। इसमें भी सहलेखक (Scribe) की आवश्यकता होती है।

3:- आप अपने आस-पास के कक्षा 11वीं एवं 12वी के बच्चों को सहलेखक (Scribe) कार्य हेतु प्रोत्साहित कर सकते हैं।

4:- जो लोग रिटायर मेंट के बाद घर में रहते हैं उन विशिष्ट जन से निवेदन करते हैं कि, आप अपने अनुभव के द्वारा उनको आगे बढने में मदद कर सकते हैं तथा अपनी शैक्षणिंक योग्यता का लाभ उन्हे पढा कर दे सकते हैं।

“मैं आप सबसे पुनः अपील करती हुँ कि अपना अमुल्य समय उपरोक्त कार्य के माध्यम से दृष्टीबाधित लोगों को दिजीए। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है कि शिक्षा दान महा दान। आपके द्वारा दिया गया सहयोग किसी दृष्टीबाधित बच्चे को आत्मनिर्भर रहते हुए सम्मान से जीने का उजाला दे सकता है। इस कार्य हेतु यदि आपके मन में कोई और जिज्ञासा(Curiosity) हो तो आप मेल करके पूछ सकते हैं।”

संगठन के सदस्य बनने के लिए आपको क्या करना है-
आपकी मेल के साथ एक फार्म अटैच करेंगे उसमें आपको, अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर शैक्षणिंक योगयता या कहाँ जॉब कर रहे हैं तथा किस क्षेत्र में काम करना चाहेंगे, ये जानकारी भरकर आपको मेल करना होगा। जिससे आपके शहर में उपस्थित दृष्टीबाधित बच्चों को आपकी अनुमती से आपका नम्बर दिया जा सके और आपके पते पर रेकार्डिगं(Recording) के लिए पुस्तकें भेजी जा सकें।

(सबसे महत्वपूर्ण बात:- कल्ब का उद्देश्य हम पुनः बताना चाहेंगे “शिक्षा के माध्यम से दृष्टीबाधित छात्रों को आत्मनिर्भर बनाना” इस प्रयोजन हेतु सभी कार्य महत्वपूर्ण है किंतु अध्यन सामग्री को रेकार्ड करना तथा परिक्षा मे सहलेखक (scribe) की भूमिका अति महत्वपूर्ण है क्योंकि ये समय सीमा में बहुत ही जिम्मेदारी से पूरा करना होता है। परिक्षा के समय सहलेखक का परिक्षा स्थल पर समय पर पहुँचना अति आवश्यक होता है।
दूसरा प्राप्त अभ्यास पठन सामग्री को उनकी परिक्षा से एक महिने पहले ही उन्हे रेकार्ड करके देना ताकि वे याद कर सकें और अच्छे से परिक्षा को क्लियर कर सकें. अतः आप में से जो भी समय की इस नजाकत को समझता है वही इस कार्य हेतु अपनी उपस्थीति दर्ज कराये। समय पर दी गई सहायता हजारों बच्चो के जीवन को रौशन कर सकती है। आप सबकी सहायता से शिक्षा की ये मशाल सदैव प्रज्वलित रहेगी , हमे इस बात का पूर्ण विश्वास है।)

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